
LTCG Tax घटेगा? विदेशी पैसा भारत से क्यों जा रहा है | 28 अक्टूबर 2026
इस साल foreign investors भारत के stock market से तीन लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा निकाल चुके हैं, और अब सरकार long-term capital gains (LTCG) tax पर दोबारा सोच रही है। SanjeevniTV के कार्यक्रम “देश, दुनिया और पैसा” की यह रिपोर्ट एक उलझन की पड़ताल करती है: अगर economy चल रही है और देश के परिवार भरोसे के साथ SIP कर रहे हैं, तो विदेशी पैसा भारत से जा क्यों रहा है, और क्या tax घटाने भर से वह लौट आएगा? (यह लेख episode की मुख्य बातों पर आधारित है।)
मुख्य बातें
- सरकार LTCG और STT की मौजूदा व्यवस्था पर investors और विशेषज्ञों की राय ले रही है; यह अभी समीक्षा है, फैसला नहीं। आज भी दर 12.5% है।
- चर्चा में दो विचार: LTCG की दर घटाना, और foreign investors का मुनाफा rupee की जगह dollar में गिनना।
- Foreign investor के सामने तीन बड़े दबाव हैं: अमेरिका का ऊँचा ब्याज, rupee की कमज़ोरी और IT जैसे sectors की कमाई पर AI का सवाल।
- सितंबर में industrial production करीब 6.7% बढ़ा, और capital goods का उत्पादन दहाई अंक में बढ़ा।
- सवा लाख रुपये की छूट के कारण दर घटने का सीधा बड़ा फायदा उन्हें होगा जिनका मुनाफा बड़ा है।
LTCG क्या है, और अभी बहस क्यों छिड़ी
जब आप कोई share या equity mutual fund एक साल से ज़्यादा रखकर बेचते हैं, तो उस मुनाफे को long-term capital gain कहते हैं। इस पर अभी 12.5% tax है, लेकिन एक financial year में सवा लाख रुपये तक के ऐसे मुनाफे पर कोई tax नहीं लगता। मसलन किसी साल आपका long-term मुनाफा दो लाख रुपये हुआ, तो सवा लाख छूट में गए और बाकी पचहत्तर हज़ार पर करीब साढ़े नौ हज़ार रुपये tax बना, cess अलग। Listed shares और equity funds पर मूल दर भारतीय और विदेशी, दोनों investors के लिए एक ही है।
जुलाई में सरकार ने संसद में कहा था कि LTCG हटाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। फिर 13 अक्टूबर को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार इस मुद्दे पर सबकी राय सुनने को तैयार है। अब रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार LTCG और STT की व्यवस्था पर राय ले रही है। ANI ने सूत्रों के हवाले से लिखा कि समीक्षा में दर घटाने का विकल्प भी शामिल है, और Moneycontrol ने एक अधिकारी के हवाले से कहा कि फैसला जल्द आ सकता है। फिर भी, समीक्षा शुरू होने का मतलब यह नहीं कि tax घट गया है।
सबसे दिलचस्प प्रस्ताव foreign investors के मुनाफे को dollar में गिनने का है। मान लीजिए किसी विदेशी investor के shares rupee में 10% चढ़े, लेकिन उसी दौरान rupee भी dollar के मुकाबले करीब 10% गिर गया। Dollar में उसकी कमाई लगभग शून्य है, फिर भी काग़ज़ पर 10% मुनाफे पर tax लगता है। यह प्रस्ताव इसी उलझन को सुलझाने की कोशिश है, हालाँकि आज ऐसा कोई नियम लागू नहीं है।
सरकार अभी क्यों सोच रही है
इसकी तीन वजहें बताई जा रही हैं। पहली, विदेशी पैसे का बहाव: Moneycontrol के मुताबिक depository आंकड़े बताते हैं कि इस साल की निकासी पिछले पूरे साल से करीब पौने दो गुना है। दूसरी, बाज़ार की थकान, जो दो साल से ज़्यादा समय से लगभग वहीं खड़ा है। तीसरी और सबसे बारीक: अब तक देसी mutual funds विदेशी बिकवाली को संभालते आए हैं, लेकिन सरकार के अंदर यह सवाल है कि क्या यह देसी सहारा हमेशा इसी ताकत से बना रहेगा।
इसके साथ STT का पुराना सवाल भी है। STT तब लाया गया था जब long-term मुनाफे पर tax नहीं था। बाद में LTCG लौट आया, और आज investor दोनों भरता है।
दूसरा पहलू भी अहम है। सरकार ने संसद को बताया था कि financial year 2024-25 की कमाई पर equity के LTCG से करीब 1.29 लाख करोड़ रुपये का tax आया। यह कमाई घटी और कमी उधार से भरी गई, तो सरकार का borrowing बढ़ेगा, जो interest rates पर दबाव डाल सकता है। वहीं SBI Research जैसी आवाज़ें कहती हैं कि पूँजी की वैश्विक होड़ में नीति की स्थिरता और साफ दिशा ज़रूरी है।
Fund manager की हिसाब वाली कॉपी
विदेशी fund manager के हिसाब में पहला number भारत का नहीं, अमेरिका का है। अमेरिका की सरकार दस साल के उधार पर करीब 5% ब्याज दे रही है, और अमेरिकी investor के लिए उसमें न currency का जोखिम है, न company डूबने का डर। भारत के shares के return में से rupee की गिरावट और tax घटाने के बाद जो बचे, वह इस सुरक्षित 5% से अच्छा-खासा ज़्यादा होना चाहिए, तभी पैसा आता है।
यानी tax इस हिसाब की एक कड़ी है, अकेली नहीं। अगर return कमज़ोर हो या rupee तेज़ी से गिरे, तो tax शून्य होकर भी हिसाब नहीं बैठता। उसी रात Federal Reserve के फैसले और Microsoft व Alphabet के नतीजों पर दुनिया की नज़र थी, क्योंकि ब्याज और AI, दोनों इस कॉपी के बड़े numbers हैं।
AI भारत की एक पुरानी ताकत की कीमत भी नए सिरे से तय कर रहा है। IT services companies के कई clients कह रहे हैं कि AI से काम तेज़ हो रहा है तो कीमत घटाओ। Reuters के मुताबिक Infosys ने इसी साल के लिए अपनी कमाई की growth का अनुमान घटाया, और AI से जुड़े कीमतों के दबाव व सुस्त माँग की बात कही। Tax यह तय करता है कि कमाई का कितना हिस्सा सरकार लेगी, लेकिन कमाई कितनी होगी, यह कारोबार तय करता है।
भारत की factories चल रही हैं, फिर पैसा क्यों भाग रहा है
उसी शाम आए आंकड़ों के मुताबिक सितंबर में industrial production पिछले साल के मुकाबले करीब 6.7% बढ़ा। Machinery और उपकरण जैसे capital goods का उत्पादन दहाई अंक में बढ़ा, जो बताता है कि companies नई क्षमता में पैसा लगा रही हैं। खनन का उत्पादन ज़रूर घटा।
तो पहेली का जवाब valuation में है। अच्छी जगह का मज़बूत मकान भी अगर बगल के शहरों के वैसे ही मकानों से काफी महँगा हो, तो समझदार खरीदार तारीफ करेगा, लेकिन पैसा वहाँ लगाएगा जहाँ उतने में ज़्यादा मिले। कई तुलनाओं में भारत के shares कमाई के मुकाबले बाकी emerging markets से महँगे रहे हैं। यानी विदेशी investor भारत की economy पर नहीं, भारत की कीमत पर सवाल उठा रहा है।
सरकार भी सिर्फ tax के भरोसे नहीं है। उसने संसद को बताया था कि इसी साल foreign investors को सरकारी bonds की कमाई पर tax छूट दी गई है, और ANI की रिपोर्ट के मुताबिक कुछ FDI नियमों में काग़ज़ी कार्यवाही घटाने पर भी विचार हो रहा है।
आपकी SIP और आपकी जेब
जिनका एक साल का long-term मुनाफा सवा लाख रुपये से कम है, उन पर आज भी यह tax नहीं लगता। इसलिए दर घटने का सीधा बड़ा फायदा बड़े मुनाफे वालों को होगा। अप्रत्यक्ष फायदा ज़्यादा लोगों तक पहुँच सकता है: अगर विदेशी पैसा लौटे तो rupee को सहारा मिल सकता है, और rupee संभले तो आयातित महँगाई का दबाव कम हो सकता है। लेकिन इस कड़ी की हर कड़ी पर एक “अगर” लगा है।
उस दिन Sensex करीब साढ़े तीन सौ अंक गिरा और गिरावट IT shares ने अगुवाई की, जबकि auto, banks और pharma में खरीदारी दिखी। Rupee 95 प्रति dollar के ऊपर बंद हुआ। पैसा बाज़ार से भागता नहीं, बाज़ार के अंदर कमरा बदलता दिखा। सबसे ज़रूरी बात: अभी सब कुछ सूत्रों की खबर है, घोषणा नहीं। अफवाह पर लिया गया निवेश फैसला कई बार tax से ज़्यादा महँगा पड़ता है।
आगे किन बातों पर नज़र रखें
- LTCG पर सरकार का औपचारिक फैसला: सिर्फ दर घटती है, छूट की सीमा बढ़ती है, या dollar में हिसाब का रास्ता खुलता है। SBI के अर्थशास्त्रियों ने LTCG हटाकर holding अवधि दो-तीन साल करने का सुझाव भी दिया है।
- Fed और Chairman Kevin Warsh का सुर: दिसंबर में बढ़ोतरी के संकेत dollar को मज़बूत और rupee को कमज़ोर कर सकते हैं।
- Big Tech के नतीजे, जो बताएँगे कि AI पर खर्च और IT services पर clients का खर्च किस तरफ मुड़ रहा है।
- अगले कुछ हफ्तों में foreign investors की खरीद-बिक्री और rupee की चाल, साथ ही ECB और Bank of Japan के फैसले।
सबसे बड़ी सीख: Tax घर की चौखट जैसा है; उसे नीचा करना समझदारी हो सकती है, लेकिन मेहमान चौखट देखकर नहीं, घर के अंदर क्या पक रहा है यह देखकर आता है। Discount से ग्राहक आता है, टिकता भरोसे से है।
स्रोत: वित्त मंत्रालय और संसद में सरकार के जवाब; सांख्यिकी मंत्रालय के सितंबर 2026 के industrial production आंकड़े; depository (NSDL) के FPI आंकड़े; ANI, Moneycontrol, Reuters और CNBC की रिपोर्टिंग; SBI Research; exchange का provisional FII data। आंकड़े 28 अक्टूबर 2026 तक के हैं।
यह लेख सिर्फ जानकारी और समझ के लिए है। यह निवेश की सलाह नहीं है।