
Essar का Iowa steel plant: भारत का steel नहीं, भारत का steel-maker चाहिए? | 29 सितंबर 2026
सात साल पहले एक भारतीय परिवार का सबसे बड़ा steel plant कर्ज़ के चलते भारत में नीलाम हुआ, और अब वही परिवार America के इतिहास का सबसे बड़ा steel plant बनाने निकला है, जिसका ऐलान खुद राष्ट्रपति Donald Trump ने White House से किया। SanjeevniTV के कार्यक्रम “देश, दुनिया और पैसा” की यह रिपोर्ट इसी पहेली को खोलती है: जिस America को भारत का steel नहीं चाहिए, उसे भारत का steel-maker क्यों चाहिए, और दीवारों की दुनिया में factory, पूँजी और नौकरियाँ किस तरफ जाएँगी? (यह लेख episode की मुख्य बातों पर आधारित है।)
मुख्य बातें
- Essar Group की US कंपनी Mesabi Metallics करीब 18 अरब डॉलर की योजना बना रही है: Iowa में करीब 15 अरब डॉलर का steel plant और Minnesota में करीब 3 अरब डॉलर की iron ore खदान।
- पहला phase सालाना 75 लाख tonne का, उत्पादन 2030 से; White House के मुताबिक करीब 1,750 स्थायी नौकरियाँ।
- America का सरकारी EXIM Bank खदान के लिए 77 करोड़ डॉलर का कर्ज़ दे रहा है और विस्तार के लिए 10 अरब डॉलर तक का संकेत।
- USTR की March 2026 की जाँच भारत की steel क्षमता को “excess” बताती है, जबकि भारत के plants अपनी क्षमता का करीब 77% ही इस्तेमाल कर रहे हैं।
- नया नियम: सबसे सस्ती जगह नहीं, बाज़ार की दीवार के अंदर बनाओ।
Iowa में क्या बन रहा है
Plant बनाएगी Minnesota की Mesabi Metallics, जिसकी मालिक Essar Group है; group के सह-संस्थापक रवि रुइया और उनके बेटे रेवंत रुइया। Minnesota की खदान लौह अयस्क को pellets में बदलेगी, और Iowa का plant इन pellets और scrap को बिजली की भट्टियों (electric arc furnace) में पिघलाकर steel बनाएगा। Business Standard के मुताबिक site से Mississippi नदी तक पहुँच है, यानी पूरी supply chain एक ही देश की सीमा के अंदर। रेवंत रुइया ने इसे “mine to mill” कहा।
Essar America में steel क्यों बनाएगी? सोचिए, शहर में घुसने वाले हर truck पर माल की कीमत का आधा toll लगे, तो समझदार व्यापारी शहर के अंदर ही godown और factory बना लेगा। June 2025 से America ने बाहर से आने वाले steel पर tariff 25% से बढ़ाकर 50% किया, और Commerce Secretary Howard Lutnick ने खुद कहा कि यह project tariffs की वजह से संभव हुआ।
ऐलान और उत्पादन में फ़र्क है। Business Standard के मुताबिक 2016 में Essar Steel Minnesota करीब एक अरब डॉलर के कर्ज़ के साथ दिवालिया हुई थी, और Essar ने बाद में बकाया कर्ज़ खरीदकर फिर नियंत्रण पाया। Essar खदान में 2 अरब डॉलर से ज़्यादा अपनी पूँजी लगा चुका है, और steel अभी चार साल दूर है।
सरकार अब referee नहीं, साझेदार भी
1934 में बना EXIM Bank असल में American export के लिए कर्ज़ देने के लिए था, लेकिन आज वह अपनी “Make More in America” पहल के तहत देश के अंदर खदान से कारखाने तक की कड़ी को कर्ज़ दे रहा है। Project November के midterm चुनाव से कुछ हफ्ते पहले सामने आया, और White House इसे कारखानों की वापसी के उदाहरण की तरह पेश कर रहा है।
Essar अकेला नहीं है। Japan की Nippon Steel ने US Steel में करीब 14 अरब डॉलर का सौदा किया, और Korea की Hyundai ने Louisiana में 5.8 अरब डॉलर का steel mill घोषित किया (दोनों 2025 की घोषणाएँ)। जब दीवार ऊँची होती है, तो माल रुकता है, लेकिन पूँजी रास्ता बदलकर दीवार के अंदर पहुँच जाती है।
दीवारें सिर्फ America नहीं बना रहा। भारत ने भी flat steel पर safeguard duty लगाई है: 2025-26 में 12%, इस साल 11.5%, और April 2028 तक। Reuters के मुताबिक छोटे उद्योगों ने शुरुआत में इसका विरोध किया था, क्योंकि उनका कच्चा माल महँगा होता। हर दीवार किसी को सुरक्षा देती है और किसी और से उसकी कीमत वसूलती है।
America की नज़र में भारत का steel
11 March 2026 को USTR ने 16 देशों और समूहों के ख़िलाफ़ excess capacity की जाँच शुरू की, जिसमें भारत भी है, और notice में लिखा कि भारत ने petrochemicals, steel और दूसरे उद्योगों में ज़रूरत से ज़्यादा क्षमता बनाई है। यानी America की नज़र में भारत में बना steel समस्या है, लेकिन भारतीय कंपनी का America में बना steel राष्ट्रीय उपलब्धि। Steel वही, बनाने वाला वही, फ़र्क सिर्फ ज़मीन का।
भारत का पक्ष भी है। सरकार ने Rajya Sabha को बताया कि 2025-26 में करीब 17 करोड़ tonne crude steel बना, जबकि क्षमता करीब 22 करोड़ tonne थी, यानी करीब 77% इस्तेमाल। तैयार steel की खपत करीब 16.4 करोड़ tonne रही और बढ़ रही है। 2024-25 में भारत लगातार दूसरे साल तैयार steel का net importer था। Commerce Ministry के मुताबिक 24 July से ज़्यादातर भारतीय सामान पर 10% का अतिरिक्त शुल्क है, लेकिन steel उससे अलग है क्योंकि उस पर पहले से 50% लगा है।
पूँजी दोनों दिशाओं में, और Hazira की सीख
CNBC ने Morgan Stanley के हवाले से बताया कि भारतीय कंपनियों का विदेश निवेश बढ़कर 35.8 अरब डॉलर हुआ, दो साल में ढाई गुना से ज़्यादा, जबकि विदेशी कंपनियाँ लगातार दूसरे साल 50 अरब डॉलर से ज़्यादा वापस ले गईं। US Embassy के मुताबिक SelectUSA summit में भारतीय कंपनियों के 20.5 अरब डॉलर के American निवेश का ज़िक्र हुआ। एक नज़र से यह भारतीय कंपनियों के multinational बनने की ताकत है; दूसरी नज़र से सवाल घरेलू निवेश का, जिस पर मुख्य आर्थिक सलाहकार निजी कंपनियों की आलोचना कर चुके हैं।
2019 में Essar Steel India का Hazira plant IBC के ज़रिए ArcelorMittal और Nippon Steel ने 42,000 करोड़ रुपये में खरीदा, और banks को मान्य दावों का 90% से ज़्यादा वापस मिला। उस समय plant करीब 75 लाख tonne सालाना की रफ़्तार से चल रहा था, Iowa के पहले phase जितना। सबसे बड़ी सीख: Hazira का plant कहीं गया नहीं; वह आज भी Gujarat में लोगों को रोज़गार दे रहा है। Factory ज़मीन से बँधी रहती है, मालिक बदलते रहते हैं।
Exporter के लिए America का बाज़ार सबसे ऊँची दीवार के पीछे है; GTRI के मुताबिक 2024-25 में भारत ने America को करीब 3.1 अरब डॉलर की लोहे-steel से बनी चीज़ें भेजीं। युवा के लिए सबक यह कि नौकरियाँ वहीं बनती हैं जहाँ factory बनती है।
दीवारें अब export पर भी
America अपने diesel के export पर रोक पर विचार कर रहा है; President Trump ने 27 September को कहा कि इस पर गंभीरता से सोचा जा रहा है, लेकिन 28 September तक कोई आदेश नहीं आया था। पहले सवाल था कि किसका माल अंदर आएगा; अब यह भी कि किसका माल बाहर जाएगा।
50% सिर्फ एक tariff rate नहीं है। जब बाज़ार में घुसने की कीमत 5-10% होती है, तो कंपनियाँ सबसे सस्ती जगह बनाकर भेजती हैं; जब 50% हो जाए, तो बाज़ार के अंदर बनाना फ़ायदे का सौदा बन सकता है। भारत की दोहरी भूमिका है: उसकी कंपनियाँ दूसरों की दीवारों के अंदर जा रही हैं, और उसे खुद विदेशी पूँजी को अपनी factories में लाना है।
आगे किन बातों पर नज़र रखें
- USTR की excess capacity जाँच का नतीजा: भारत के दूसरे manufactured सामान पर नई दीवार बनती है या नहीं।
- India-US व्यापार समझौता, और क्या steel जैसे उद्योग उसमें आते हैं।
- Minnesota की खदान का पहला pellet (October) और Iowa plant की मंज़ूरियाँ व कर्ज़।
- RBI के outward investment आंकड़े, भारत में steel imports और safeguard duty, और US diesel export ban पर फ़ैसला।
सबसे बड़ी सीख: दीवारें माल रोकती हैं, पैसा नहीं। पैसा दीवार के अंदर जाकर factory बना लेता है, और नौकरियाँ वहीं पैदा होती हैं। आने वाले सालों का सबसे बड़ा सवाल यह नहीं होगा कि कौन क्या बनाता है, बल्कि यह कि कौन कहाँ बनाता है।
स्रोत: White House घोषणा (28 सितंबर 2026, AP, CNBC, NBC, Iowa Public Radio की रिपोर्टिंग); Business Standard; US EXIM Bank; USTR Federal Register notice (11 मार्च 2026); PIB/वाणिज्य मंत्रालय; वित्त मंत्रालय (safeguard duty notification); Rajya Sabha में सरकार का जवाब; Steel Ministry; CNBC (Morgan Stanley); US Embassy India; ArcelorMittal (2019); GTRI; Reuters। आंकड़े 29 सितंबर 2026 तक के हैं।
यह लेख सिर्फ जानकारी और समझ के लिए है। यह निवेश की सलाह नहीं है।
