Ravindra Gautam SanjeevniTV के Founder और Editor-in-Chief हैं, और Hindi business पत्रकारिता का जाना-पहचाना चेहरा हैं। वे Zee Business पर business कार्यक्रम “Winners with Ravindra Gautam” के host रहे, जो बाद में News18 India और CNBC Awaaz पर भी प्रसारित हुआ। वे Aquarius Mediaa के founder हैं। आज वे SanjeevniTV के prime-time कार्यक्रम “देश, दुनिया और पैसा” के anchor हैं, जो हर रात 10 बजे देश-दुनिया की आर्थिक और geopolitical खबरों को बाज़ार, कारोबार और आम परिवार की जेब से जोड़कर पेश करता है। उनकी पत्रकारिता का ज़ोर खबर के पीछे की असली कहानी, आंकड़ों की जाँच और भरोसेमंद स्रोतों पर है।
AI के खर्च के लिए Meta नए shares बेचकर 95 अरब डॉलर तक जुटाएगी, France का उधार 2002 के बाद सबसे महँगा हुआ। पैसे की इस मंडी में भारत, rupee और आपकी EMI कहाँ खड़े हैं?
लगातार चार दिन की गिरावट के बाद Sensex 483 अंक चढ़ा और निवेशकों की दौलत करीब ₹3.75 लाख करोड़ बढ़ी। लेकिन 443 शेयर साल के निचले स्तर पर रहे। राहत असली है या थोड़ी देर की धूप?
सितंबर में core sector 7.9% बढ़ा, लेकिन RBI के minutes बताते हैं कि महँगाई सिर्फ बढ़ नहीं रही, टोकरी की 37% चीज़ों तक फैल चुकी है। रफ्तार और गरमी के इस संतुलन का असर परिवार, कारोबारी और सरकार पर।
Taiwan के export orders रिकॉर्ड पर, फिर भी Korea में AI शेयर टूटे। भारत में बेरोज़गारी स्थिर, लेकिन शहरी महिलाओं की मुश्किल बढ़ी। और petrol के दाम वही, फिर भी तेल का बिल बढ़ रहा है।
20 अक्टूबर से New Zealand भारत के हर सामान पर duty शून्य करेगा। चीन की growth exports के भरोसे, AI technology पर export control का draft, और MSCI के प्रस्ताव से Indonesia का बाज़ार 10% टूटा।
RBI के बड़े कदमों से रुपया record low के पास से संभलकर चार साल की सबसे बड़ी हफ्तेवार बढ़त पर पहुँचा। लेकिन इस दीवार की कीमत bond yields, hedging और reserves में दिख रही है। टिकाऊ डॉलर कहाँ से आएँगे?
Korea का Kospi 7.57% टूटा, उसी दिन Sensex चार महीने में सबसे ज़्यादा चढ़ा। जिस AI-कमी की वजह से भारत पूरे साल पीछे रहा, क्या वही आज ढाल बनी? और क्या विदेशी पैसा सच में लौट रहा है?
April-June में विदेश से आए personal transfers 42.9 अरब डॉलर थे, net FDI balance से करीब सात गुना। Services और लोगों की कमाई ने सामान का पूरा घाटा ढका। लेकिन ये इंजन अब नई दीवारों के सामने हैं।
जो America भारतीय steel पर 50% tariff लगाता है, वही Essar को अपने इतिहास का सबसे बड़ा steel plant बनाने के लिए सरकारी bank से कर्ज़ दे रहा है। Tariff की दीवार माल रोकती है, पूँजी नहीं।
US 10-year Treasury yield करीब 5.2% पर, 2007 के बाद सबसे ऊँचा। छह ताकतें एक साथ पैसे की कीमत बढ़ा रही हैं, AI companies भी कर्ज़ की कतार में हैं। ऐसे में भारत की financing की ताकत कहाँ है?