भारत का Dollar कहाँ से आता है? भारत की कमाई के 4 इंजन | 30 सितंबर 2026

Dubai की construction site पर काम करने वाला भारतीय, America की software company में बैठी भारतीय engineer, London के अस्पताल की भारतीय nurse: महीने के आखिर में तीनों एक ही काम करते हैं, घर पैसे भेजते हैं। वित्त वर्ष की पहली छमाही के आखिरी दिन, SanjeevniTV के कार्यक्रम “देश, दुनिया और पैसा” की यह रिपोर्ट देश का dollar वाला बही-खाता खोलकर पूछती है: भारत का dollar असल में आता कहाँ से है, और बदलती दुनिया में कमाई के ये रास्ते कितने सुरक्षित हैं? (यह लेख episode की मुख्य बातों पर आधारित है।)

मुख्य बातें

  • RBI के मुताबिक April-June 2026 में personal transfers करीब 42.9 अरब डॉलर रहे, पिछले साल करीब 33 अरब; उसी तिमाही में net FDI balance करीब 6.1 अरब डॉलर।
  • सामान का घाटा 86.1 अरब डॉलर, लेकिन services (51.6 अरब) और transfers (करीब 41 अरब) ने मिलकर उसे ढक दिया; current account deficit GDP का सिर्फ 0.5%।
  • पिछले वित्त वर्ष में workers’ remittances पहली बार 100 अरब डॉलर पार, करीब 110 अरब।
  • भारत में 2,117 GCC करीब 23.6 लाख लोगों को काम दे रहे हैं; दुनिया का काम भारत आ रहा है।
  • नई दीवारें: America का 1% remittance tax और H-1B fee पर कानूनी खींचतान।

Dollar का बही-खाता

इसे परिवार के बजट की तरह समझिए। पहला पन्ना सामान का है: April-June में भारत ने जितना बेचा, उससे 86.1 अरब डॉलर ज़्यादा का खरीदा, जिसमें बड़ा हिस्सा कच्चे तेल का है। दूसरा पन्ना services का, यानी software, consulting, IT और back-office का काम, जिसकी net कमाई 51.6 अरब डॉलर रही। तीसरा पन्ना transfers का, जिसकी net कमाई करीब 41 अरब डॉलर। दोनों मिलकर करीब 92 अरब डॉलर, यानी लोगों की मेहनत और हुनर ने सामान के पूरे घाटे की भरपाई कर दी।

चौथा पन्ना primary income का है, यानी निवेश पर आने और बाहर जाने वाली income, और इस पर भारत से ज़्यादा बाहर गया। इसे जोड़कर current account deficit 4.2 अरब डॉलर बना, GDP का सिर्फ आधा प्रतिशत। Capital वाले पन्ने पर विदेशी portfolio निवेशक करीब 9.6 अरब डॉलर निकाल ले गए, और forex reserves करीब 8.1 अरब घटे।

DPIIT के मुताबिक FDI equity 19.81 अरब डॉलर रही, पिछले साल से करीब 6% ज़्यादा, लेकिन ज़्यादातर अकेले April में आई। Japan 5.71 अरब डॉलर के साथ सबसे बड़ा स्रोत रहा, जबकि US से FDI 76% घटा। Personal transfers का आकार net FDI balance से करीब सात गुना था, लेकिन दोनों अलग तरह के पैसे हैं: remittance परिवार तक पहुँचता है, FDI business और नई क्षमता बनाता है। भारत को दोनों चाहिए।

क्या बदल रहा है: तीन बदलाव

पहला, दुनिया का काम भारत आ रहा है। Nasscom और Zinnov की report के मुताबिक भारत में 2,117 Global Capability Centres हैं, जिनमें करीब 23.6 लाख लोग काम करते हैं। Cost अब भी एक factor है, लेकिन कंपनियाँ technology, analytics, research और खास हुनर के लिए भी भारत का इस्तेमाल कर रही हैं। पहले कहानी थी कि भारतीय दुनिया में जाकर कमाता है; अब साथ में यह भी कि दुनिया का काम भारत आता है और कमाई dollar में आती है।

दूसरा, घर भेजे पैसे का record। RBI आंकड़ों पर आधारित reports के मुताबिक पिछले वित्त वर्ष में करीब 110 अरब डॉलर आए। वजहें: West Asia संकट में एहतियात के तौर पर ज़्यादा पैसा घर भेजना, और कमज़ोर rupee। January 2026 में 1,000 डॉलर पर घर करीब 90 हज़ार रुपये पहुँचते थे, अब करीब 95-96 हज़ार।

तीसरा, भारतीय कंपनियों का पैसा अब दोनों दिशाओं में चल रहा है। BCG के मुताबिक January-July 2026 में भारतीय कंपनियों ने विदेशी कंपनियाँ खरीदने में करीब 8.8 अरब डॉलर लगाए, पिछले साल से 76% ज़्यादा, जबकि विदेशियों का भारतीय कंपनियाँ खरीदने का मूल्य 58% घटकर करीब 2.7 अरब डॉलर रहा।

तीसरी दीवार: लोगों और उनके पैसे पर नियम

दुनिया ने पहले सामान पर tariff की दीवारें खड़ी कीं, फिर पूँजी पर शर्तें लगाईं, और अब लोगों की आवाजाही और उनके भेजे पैसे पर नियम उभर रहे हैं। 1 January 2026 से America ने cash, money order जैसे तरीकों से विदेश भेजे पैसे पर 1% tax लगाया है; bank account या card से भेजा पैसा इससे बाहर है। असर छोटा है, लेकिन संकेत बड़ा।

H-1B पर, जिसका उपलब्ध अनुमानों के मुताबिक 70% से ज़्यादा हिस्सा भारतीयों को मिलता है, September 2025 में कुछ नए मामलों के लिए 1 लाख डॉलर के भुगतान की शर्त लगी थी। काग़ज़ पर इसे 21 September 2027 तक बढ़ा दिया गया, लेकिन Massachusetts की court ने June में fee रद्द की और appeals court ने रोक से इनकार किया, इसलिए फ़िलहाल यह वसूली नहीं जा रही; सरकार appeal में है। The Week के मुताबिक बड़ी भारतीय IT कंपनियों की H-1B मंज़ूरियाँ आधी से ज़्यादा घट गईं।

लेकिन दिलचस्प मोड़ यह है कि जब engineer तक पहुँचना मुश्किल हो, तो कंपनी काम को भारत ला सकती है। दीवार ने आवाजाही रोकी, लेकिन काम ने रास्ता बदल लिया। LSE के economist Danny Quah ने 2011 में अनुमान लगाया था कि दुनिया की आर्थिक गतिविधि का “गुरुत्व केंद्र” 2050 तक भारत और China के बीच पहुँच जाएगा।

भारत कहाँ खड़ा है

ताकत यह है कि services और घर भेजा पैसा ऐसा बहाव है जो बाज़ार के मूड के साथ उतनी तेज़ी से नहीं बदलता। शेयर बाज़ार का विदेशी निवेशक एक खबर पर पैसा निकाल सकता है, लेकिन हर महीने घर पैसा भेजने वाला बेटा डर की खबर पर अक्सर पैसा कम नहीं करता।

कमज़ोरी यह है कि cross-border निवेश का net balance छोटा है, और लोगों की कमाई वाला सहारा दूसरे देशों के फ़ैसलों पर टिका है: visa नियम America तय करता है, Gulf की नौकरियाँ वहाँ की शांति पर टिकी हैं, और remittance tax भेजने वाला देश तय करता है। ईमानदार जवाब: आज भारत का dollar खाता संभला हुआ है, लेकिन उसकी कुछ बड़ी नींवें ऐसी ज़मीन पर हैं जिसके नियम भारत तय नहीं करता।

प्रवासी भारतीय FCNR(B) deposits के ज़रिए भी जुड़े हैं: RBI की खास swap सुविधा में 18 September तक करीब 143.5 अरब डॉलर आए, जिनमें करीब 133 अरब FCNR(B) से। यह remittance नहीं, banking और capital flow है, जिसे लौटाना भी पड़ता है। और भारतीय पूँजी Global South तक जा रही है: 14 September को Nagpur की Solar Industries ने South Africa की Omnia Holdings को करीब 1.36 अरब डॉलर (12,951 करोड़ रुपये) में खरीदने का समझौता किया।

आम आदमी के लिए मतलब

अगर पैसा America से cash या money order से आता है, तो उस पर अब 1% tax लग सकता है। विदेश में पढ़ाई और नौकरी का सपना देखने वालों को सिर्फ college नहीं, उस देश की visa नीति भी देखनी चाहिए। छोटे शहरों में technology या data का हुनर रखने वालों के लिए नया रास्ता खुल रहा है, क्योंकि GCC अब tier-2 शहरों तक पहुँच रहे हैं।

और जिस घर में हर महीने विदेश से पैसा आता है, उसके लिए सवाल वही है जो देश के लिए: घर आया पैसा सिर्फ खर्च बनता है, या बचत, बच्चों के हुनर और छोटे काम-धंधे में लगकर आगे की ताकत?

आगे किन बातों पर नज़र रखें

  • H-1B मामले में अगली court या appeal development: requirement लंबे समय तक बनी रही, तो talent और काम के गणित पर असर पड़ सकता है।
  • RBI का July-September तिमाही का Balance of Payments: remittances की रफ़्तार बनी रहती है या धीमी होती है।
  • FDI का monthly रुझान: May-June की कमी अस्थायी थी या नया pattern।

सबसे बड़ी सीख: भारत की external strength सिर्फ RBI के forex reserves में नहीं, उसके लोगों के हुनर और दुनिया से कमाई गई आय में भी है। सवाल यह है कि भारत इस ताकत को remittance तक सीमित रखता है, या investment, entrepreneurship और jobs में बदलता है।

स्रोत: RBI (Q1 FY27 Balance of Payments, 1 सितंबर 2026; swap facility data); DPIIT (FDI आंकड़े); Nasscom-Zinnov India GCC Landscape 2026; BCG; IRS नियम; अमेरिकी अदालतों के फ़ैसले (Ellis, Immihelp, Business Standard की रिपोर्टिंग); The Week; Danny Quah (LSE, 2011); PTI। आंकड़े 30 सितंबर 2026 तक के हैं।

यह लेख सिर्फ जानकारी और समझ के लिए है। यह निवेश की सलाह नहीं है।

Author

  • Ravindra Gautam

    Ravindra Gautam SanjeevniTV के Founder और Editor-in-Chief हैं, और Hindi business पत्रकारिता का जाना-पहचाना चेहरा हैं। वे Zee Business पर business कार्यक्रम “Winners with Ravindra Gautam” के host रहे, जो बाद में News18 India और CNBC Awaaz पर भी प्रसारित हुआ। वे Aquarius Mediaa के founder हैं। आज वे SanjeevniTV के prime-time कार्यक्रम “देश, दुनिया और पैसा” के anchor हैं, जो हर रात 10 बजे देश-दुनिया की आर्थिक और geopolitical खबरों को बाज़ार, कारोबार और आम परिवार की जेब से जोड़कर पेश करता है। उनकी पत्रकारिता का ज़ोर खबर के पीछे की असली कहानी, आंकड़ों की जाँच और भरोसेमंद स्रोतों पर है।

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