
Nasdaq 6% टूटा, तेल फिर चढ़ा, ट्रंप की नई धमकी: छह दिन की तेज़ी के बाद कैसी शुरुआत? | दुनिया से बाज़ार तक | 6 नवंबर 2026
बुधवार को जिस अमेरिकी बाज़ार ने record बनाया था, वह गुरुवार को धड़ाम हो गया। Nasdaq 100 6 percent से ज़्यादा टूटा, तेल ने फिर पलटी मारी, और चुनाव में हार के ठीक एक दिन बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिका को शायद ईरान का “बचा हुआ हिस्सा भी तबाह” करना पड़े। SanjeevniTV के सुबह के कार्यक्रम “दुनिया से बाज़ार तक” की इस रिपोर्ट में पढ़िए कि 24 घंटे पहले बनी शांति की उम्मीद कितनी जल्दबाज़ी थी, और छह दिन में करीब 8 percent चढ़ा भारतीय बाज़ार एक साथ दो झटके, ईरान और AI, कैसे झेलेगा।
मुख्य बातें
- ट्रंप ने कहा कि ईरान को दोबारा बनाने में 25 साल लगेंगे; Reuters से बात करने वाले सूत्रों ने बमबारी की योजना का दावा किया।
- साथ ही Reuters के मुताबिक ईरान ने क़तर के ज़रिए परमाणु मुद्दे पर एक प्रस्ताव भेजा है, जिसकी Washington समीक्षा कर रहा है।
- Hormuz में जहाज़ों पर हमले जारी हैं; अक्टूबर में 35 जहाज़ निशाना बने, जो इस युद्ध का सबसे बुरा महीना था।
- Brent बुधवार को 94.62 डॉलर तक गिरने के बाद गुरुवार को 2.2% चढ़कर 96.70 डॉलर पर पहुँचा।
- AI पर नई रोक के डर से Nasdaq 100 6.36% और S&P 500 4% से ज़्यादा टूटा; Kospi आज सुबह 3.85% नीचे।
- FII ने गुरुवार को 14,974.68 करोड़ रुपये के शेयर ख़रीदे, जबकि DII ने 10,444.54 करोड़ की बिकवाली की।
- Nifty futures 24,449.5 पर, यानी छह दिन की तेज़ी के बाद कमज़ोर शुरुआत के संकेत।
ट्रंप की नई भाषा
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका को शायद ईरान का बचा हुआ हिस्सा भी “तबाह” करना पड़े, और उसे दोबारा बनाने में 25 साल लगेंगे। फिर जोड़ा, “आपको जल्द पता चल जाएगा।” Reuters से बात करने वाले दो सूत्रों का दावा और भी चौंकाने वाला है। उनमें से एक ने कहा कि प्रशासन ईरान पर बमबारी की योजना बना रहा है, और midterm चुनाव की वजह से ही रुकने का फ़ैसला किया गया था।
Al Jazeera के मुताबिक ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका ईरान में वह सब नियंत्रित कर रहा है “जो वह चाहता था”, और तेहरान अमेरिका की “मंज़ूरी” के बिना अपने परमाणु कार्यक्रम पर कुछ नहीं कर सकता। अमेरिकी Congress की सदस्य Yassamin Ansari ने इसे “मानवता के ख़िलाफ़ अपराध” की धमकी बताया। ईरान की ओर से भी तीखा जवाब आया: संसद स्पीकर ग़ालिबाफ़ ने उपराष्ट्रपति Vance पर तंज़ कसा, और IRGC ने चेताया कि अमेरिका को नए हमलों में मदद देने वाला हर देश “जायज़ निशाना” होगा।
समझौते की खिड़की अभी खुली है
लेकिन तस्वीर सिर्फ़ धमकियों की नहीं है। Reuters के मुताबिक एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने बताया कि तेहरान ने क़तर के ज़रिए अमेरिका को परमाणु मुद्दे पर एक प्रस्ताव भेजा है, और Washington उसकी समीक्षा कर रहा है। ईरान की शर्त है कि बातचीत तभी शुरू होगी जब उसकी सात माँगें मानी जाएँ। ओमान ने भी कहा है कि वह Hormuz में जहाज़ों की आवाजाही के लिए ईरान के साथ एक साझा व्यवस्था पर बात कर रहा है, जो उसके शब्दों में “युद्ध की स्थिति को ख़त्म कर सकती है”। ईरान के विदेश मंत्री अराग़ची ने एक ही दिन में सऊदी अरब, पाकिस्तान और क़तर समेत नौ देशों के विदेश मंत्रियों से बात की।
अमेरिका के भीतर भी दबाव है। AP के एक लाख से ज़्यादा मतदाताओं के survey में करीब दस में से छह लोगों ने ईरान पर हमले को “ग़लत फ़ैसला” कहा। पर इसकी सीमा भी है: सिर्फ़ करीब एक तिहाई मतदाताओं के लिए युद्ध उनके vote का “निर्णायक” मुद्दा था, जबकि करीब आधे लोगों के लिए महँगाई और भ्रष्टाचार बड़े मुद्दे थे। दस में से छह मतदाता petrol-diesel की क़ीमत को लेकर “बहुत चिंतित” थे। यानी युद्ध ने सीधे कम, जेब के रास्ते ज़्यादा चोट की।
Washington में खींचतान
विदेश मंत्री Marco Rubio ने New York Times से माना कि petrol pump पर ऊँची क़ीमतें चुनाव में गर्व की बात नहीं, लेकिन इसे “नेतृत्व की क़ीमत” बताया। House की विदेश मामलों की समिति के वरिष्ठ Democrat Gregory Meeks ने कहा है कि जनवरी में वे युद्ध “तुरंत ख़त्म” करने के प्रस्ताव लाएँगे। लेकिन ट्रंप ने साफ़ कहा है कि Democrats जो भी क़ानून पास करें, उन पर उनके पास veto की ताक़त है। यानी Congress और White House के बीच टकराव की ज़मीन तैयार है, और कोई भी बदलाव जल्दी नहीं आएगा।
ज़मीन पर टकराव जारी
ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी UKMTO के आँकड़ों के मुताबिक रविवार से अब तक कम से कम पाँच जहाज़ों के साथ घटनाएँ हुई हैं। अक्टूबर में 35 जहाज़ निशाना बने थे, जो इस युद्ध का अब तक का सबसे बुरा महीना था। ईरान की नौसेना का कहना है कि पिछले 24 घंटों में कम से कम पाँच tankers बारूदी सुरंगों से टकराकर आग की चपेट में आए। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने मदीना की ओर दागी गई एक हूती missile नष्ट करने का दावा किया, जिससे हूतियों ने इनकार किया है।
मॉस्को से भी एक संकेत आया। ईरान के सुरक्षा प्रमुख मोहसिन रेज़ाई ने राष्ट्रपति पुतिन से मुलाक़ात की, और उसी दिन रूस ने अपने नागरिकों को “नए escalation के ख़तरे” का हवाला देकर ईरान न जाने की सलाह दोहराई। राहत की एक बात यह है कि CBS के मुताबिक अमेरिका का तीसरा विमानवाहक पोत USS Theodore Roosevelt कम से कम दो हफ़्ते तक मध्य पूर्व नहीं पहुँचेगा, हालाँकि वहाँ पहले से दो carrier strike groups मौजूद हैं। उधर इज़राइल में सरकार बनाने की गुत्थी उलझी हुई है; राष्ट्रपति Herzog रविवार को किसी नेता को सरकार बनाने का न्योता देंगे।
तेल: 104 से नीचे क्यों आया, फिर क्यों चढ़ा
मंगलवार को Brent 103.60 डॉलर पर था। बुधवार को चुनावी नतीजों के बाद लगभग 9 percent टूटकर 94.62 डॉलर पर आ गया। गुरुवार को CBS के मुताबिक Brent 2.2 percent चढ़कर 96.70 डॉलर तक पहुँचा, और MCX पर crude 196 रुपये (2.34%) चढ़कर 8,560 रुपये पर बंद हुआ।
नीचे आने की वजह उम्मीद थी: बाज़ार ने मान लिया था कि हार के बाद ट्रंप समझौते की ओर झुकेंगे। ऊपर जाने की वजह हक़ीक़त है: Hormuz में tankers पर हमले नहीं रुके, ट्रंप की “तबाह करने” वाली धमकी आई, और रूस की travel चेतावनी बताती है कि बड़े देश भी ख़तरा टला हुआ नहीं मान रहे। Reuters के मुताबिक तेल अब भी पिछले हफ़्ते के मुक़ाबले 20 डॉलर प्रति बैरल से ज़्यादा सस्ता है। राहत बनी हुई है, पर उसकी नींव कमज़ोर है।
भारत के लिए असली मुश्किल ऊँचा भाव नहीं, यह उठापटक है। एक दिन में 9 percent की गिरावट और अगले दिन वापसी के माहौल में तेल कंपनियाँ, airlines या सरकार, कोई भी आगे की योजना भरोसे से नहीं बना सकता। भारत अपनी ज़रूरत का ज़्यादातर तेल आयात करता है, इसलिए Hormuz की हर ख़बर सीधे आयात बिल और रुपये तक पहुँचती है।
दुनिया के बाज़ार और AI का झटका
गुरुवार की कहानी तेल से ज़्यादा AI की है। Al Jazeera के मुताबिक S&P 500 4 percent से ज़्यादा गिरा, जो पिछले साल अप्रैल के बाद उसकी सबसे बुरी गिरावट है। Nasdaq 100 1,807 points (6.36%) टूटकर 26,629 पर और Dow Jones 1,833 points (3.44%) गिरकर 51,523 पर बंद हुआ। वजह: Democrats की जीत के बाद निवेशकों को डर है कि data centres पर रोक बढ़ेगी और AI से जुड़ा निर्माण धीमा पड़ेगा। टेक्सास की नई governor Gina Hinojosa ने भी कहा है कि लोगों की सुरक्षा के क़ानून बनने तक data centres का काम रोकना होगा।
यूरोप में असर हल्का रहा: DAX 0.43%, EU500 0.40% और London का LSEG 0.51% नीचे बंद हुए। आज सुबह Asia में दक्षिण कोरिया का Kospi 3.85% टूटकर 5,176 पर है, Hang Seng 0.36% नीचे और जापान का Nikkei 1.64% ऊपर है। कोरिया पर दोहरी मार है: वह तेल आयातक है और उसका बाज़ार chip कंपनियों पर टिका है। भारत की बनावट अलग है, पर हमारी IT कंपनियाँ अमेरिकी technology ख़र्च पर काफ़ी निर्भर हैं, इसलिए Nasdaq की गिरावट का कुछ असर उन पर दिख सकता है।
Fed, डॉलर और आपकी जेब
Fed की दरें 3.75 से 4 percent के बीच हैं, और दिसंबर की बैठक में उसे दो उलटी ताक़तों में संतुलन बनाना होगा। एक तरफ़ AI शेयरों में भारी नुक़सान अमेरिकी परिवारों की बचत और ख़र्च पर असर डाल सकता है, जो अर्थव्यवस्था को धीमा करता है। दूसरी तरफ़ तेल का फिर चढ़ना महँगाई का डर ज़िंदा रखता है।
भारत पर इसका असर दो रास्तों से आता है। पहला, डॉलर: दुनिया के बाज़ार डरते हैं तो पैसा सुरक्षित ठिकाने की तलाश में डॉलर की ओर भागता है, और रुपये पर दबाव बढ़ता है। दूसरा, आपकी जेब: तेल जितना महँगा, देश का आयात बिल उतना बड़ा, और petrol-diesel, माल ढुलाई और आख़िर में रसोई का ख़र्च उसी दिशा में चलते हैं। अगर Fed तेल की वजह से दरें ऊँची रखता है, तो RBI के लिए भी आपकी EMI घटाने की गुंजाइश सीमित रहती है।
भारतीय बाज़ार: कल का हाल और आज की शुरुआत
गुरुवार को Nifty 576 points (2.40%) चढ़कर 24,536.60 पर, Sensex 2,008.61 points उछलकर 79,310.01 पर और Bank Nifty 1,860.05 points (3.33%) चढ़कर 57,773.65 पर बंद हुआ। यह लगातार छठा दिन था जब बाज़ार ऊपर बंद हुआ। 28 अक्टूबर के 22,698.85 से अब तक Nifty करीब 8.1 percent चढ़ चुका है।
असली पैसा FII और DII के आँकड़ों में दिखता है। विदेशी निवेशकों ने गुरुवार को 14,974.68 करोड़ रुपये के शेयर net ख़रीदे, जो बुधवार के 7,284 करोड़ से दोगुने से ज़्यादा है। घरेलू संस्थाओं ने 10,444.54 करोड़ की net बिकवाली की। 30 अक्टूबर से लगातार पाँच दिनों में FII करीब 35,809 करोड़ रुपये के net ख़रीदार रहे और DII करीब 19,045 करोड़ के net बिकवाल। तस्वीर साफ़ है: इस तेज़ी का इंजन विदेशी पैसा है, और घरेलू संस्थाएँ हर उछाल पर मुनाफ़ा निकाल रही हैं।
आज सुबह Nifty futures 24,449.5 पर हैं, 150 points (0.61%) नीचे, यानी कल के Nifty close से करीब 87 points नीचे। ध्यान रहे, कल हमारा बाज़ार दोपहर 3:30 बजे बंद हो चुका था, जबकि अमेरिकी गिरावट भारतीय समय से रात में आई। यानी Nasdaq का झटका अभी हमारे भाव में शामिल नहीं हुआ है। तेल का फिर चढ़ना oil marketing कंपनियों, aviation और paint जैसे sectors पर दबाव डाल सकता है।
आज की शुरुआत के तीन संभावित रास्ते
- सबसे संभावित, हल्की गिरावट: futures के संकेत के मुताबिक शुरुआत नरम रह सकती है। छह दिन में 8 percent की तेज़ी के बाद मुनाफ़ावसूली का बहाना बाज़ार को मिल गया है।
- कमज़ोर शुरुआत, फिर सँभलना: अगर FII छठे दिन भी ख़रीदार बने रहते हैं, तो शुरुआती गिरावट दिन में कम हो सकती है। Nasdaq की गिरावट AI की कहानी है, और भारत AI का बड़ा खिलाड़ी नहीं।
- कम संभावित, गहरी गिरावट: अगर ईरान पर नए हमले की ख़बर आती है, Hormuz में कोई बड़ी घटना होती है या Brent फिर 100 डॉलर की ओर बढ़ता है, तो बिकवाली तेज़ हो सकती है, ख़ासकर IT शेयरों में।
हमारा आकलन
बुधवार को बाज़ार ने चुनावी नतीजों में सिर्फ़ शांति देखी। गुरुवार को उसे याद आया कि उन्हीं नतीजों के दो और मतलब हैं: AI पर नए नियमों का ख़तरा, और एक ऐसा राष्ट्रपति जिसके सामने अब चुनाव का डर नहीं। भारत के लिए एक और बात अहम है: हमारी तेज़ी इस वक़्त लगभग पूरी तरह विदेशी पैसे पर टिकी है, और जिस दिन दुनिया में डर बढ़ेगा, वही पैसा सबसे पहले बाहर निकल सकता है। जब दुनिया का मिज़ाज कुछ AI कंपनियों और एक व्यक्ति के बयानों पर टिका हो, तो आम निवेशक के लिए सबसे बड़ा सबक रफ़्तार नहीं, संतुलन है।
आगे किन बातों पर नज़र रखें
- Brent 100 डॉलर से नीचे टिकता है या नहीं।
- FII की ख़रीद का सिलसिला छठे दिन भी जारी रहता है या टूटता है।
- क़तर के ज़रिए भेजे गए ईरानी प्रस्ताव पर अमेरिका का जवाब।
- रविवार को इज़राइल में सरकार बनाने का न्योता किसे मिलता है।
स्रोत: Reuters; Al Jazeera; AP VoteCast; CBS News; New York Times; UKMTO; NSE; BSE; MCX। बाज़ार के आँकड़े 5 नवंबर 2026 के बंद भाव और 6 नवंबर सुबह के pre-market संकेत हैं।
यह लेख सिर्फ जानकारी और समझ के लिए है। यह निवेश की सलाह नहीं है।
