
Battery, Lithium और Nickel: ऊर्जा के अगले झटके से बचने की भारत की तैयारी | 5 नवंबर 2026
जिस देश की सबसे बड़ी कमज़ोरी बाहर से आने वाली ऊर्जा हो, उसके लिए असली सवाल यह नहीं कि तेल आज कितना सस्ता है, बल्कि यह कि अगला ऊर्जा संकट आए तो भारत कितना तैयार होगा। 4 नवंबर को Union Cabinet ने इसी सवाल से जुड़े दो बड़े फैसले लिए।
मुख्य बातें
- Energy storage के लिए करीब 14,500 करोड़ रुपये की Viability Gap Funding; लक्ष्य 92 gigawatt-hour।
- इसमें 60 GWh pumped storage, 30 GWh battery storage और 2 GWh नई तकनीकें।
- Lithium और nickel processing के लिए 2,814 करोड़ रुपये: चार plants के पात्र निवेश पर 30% तक capital subsidy।
- Storage से तेल का आयात अपने आप नहीं घटेगा; इसके लिए electric गाड़ियों का बढ़ना भी ज़रूरी।
बिजली जमा करने की बड़ी योजना
Viability Gap Funding का मतलब है कि किसी project की लागत और उसे फायदेमंद बनाने के बीच जो खाई है, उसका एक हिस्सा सरकार भरेगी, जैसे घाटे वाले रास्ते पर bus चलवाने के लिए सरकार घाटे का कुछ हिस्सा दे। Pumped storage में सस्ती और ज़्यादा बिजली के समय पानी ऊपर के जलाशय में चढ़ाया जाता है, और शाम को माँग चरम पर हो तो उसी पानी से बिजली बनाई जाती है; पानी एक बड़ी battery बन जाता है।
भारत सूरज और हवा से तेज़ी से बिजली बना रहा है, लेकिन सूरज रात को नहीं चमकता। Storage दिन की सस्ती बिजली को रात तक बचाकर रखता है, जिससे बिजली के लिए हर समय बाहर के ईंधन पर निर्भरता घटती है।
तेल का आयात अपने आप नहीं घटेगा
भारत में crude का सबसे बड़ा इस्तेमाल गाड़ियों और उद्योग के कच्चे माल में होता है, बिजली बनाने में नहीं। इसलिए तेल का आयात तब घटेगा जब electric गाड़ियाँ भी बढ़ेंगी, यानी ऊर्जा सुरक्षा के लिए storage और electric mobility दोनों ज़रूरी हैं।
यहीं दूसरा फैसला जुड़ता है। Electric गाड़ी battery से चलती है और battery lithium व nickel से। भारत battery-ग्रेड lithium, nickel और cobalt के लिए आज काफी हद तक आयात पर निर्भर है। अगर तेल छोड़कर battery अपनाई और battery का माल किसी और देश से आया, तो एक निर्भरता सिर्फ दूसरी से बदलेगी।
मंज़ूरी पहला कदम है
Cabinet की मंज़ूरी plant बन जाना नहीं है। असली परीक्षा यह होगी कि ये projects ज़मीन पर कितनी जल्दी उतरते हैं। ये फैसले आज के petrol के दाम नहीं बदलेंगे, लेकिन दस साल बाद का भारत इसी तरह के फैसलों से बनेगा।
हमारा नज़रिया: तेल का झटका भारत को हर बार एक ही सबक देता है, और इस बार सरकार ने उस सबक को budget की भाषा में लिखा है।
स्रोत: केंद्रीय मंत्रिमंडल के 4 नवंबर 2026 के फैसले (PIB)। आंकड़े 5 नवंबर 2026 तक के हैं।
यह लेख सिर्फ जानकारी और समझ के लिए है। यह निवेश की सलाह नहीं है।
