विकास या विनाश का चक्र: आखिर कब थमेगी जनता के पैसों और पर्यावरण की बर्बादी? – डा. अंजुलिका जोशी
हमारे देश में एक कहावत मशहूर हो चली है— “अगर सड़क चकाचक बन गई है, तो समझ लीजिए कि अगले हफ्ते नाला खोदने वाली मशीन आने वाली है।” सुनने में यह व्यंग्य लगता है, लेकिन यह उन करोड़ों करदाताओं की कड़वी हकीकत है, जिनकी मेहनत की कमाई को ‘नियोजन’ (Planning) के नाम पर मिट्टी में […]



