बजट 2026 और दमघोंटू हकीकत: क्या बिना ‘सांसों’ के मुमकिन है विकास? – डा. अंजुलिका जोशी

नई दिल्ली:
भारत एक ऐसे निर्णायक दौर से गुजर रहा है जहाँ आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभर रहा है। एक ओर देश वैश्विक अर्थव्यवस्था में मजबूत भूमिका निभाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर जलवायु परिवर्तन, बढ़ता तापमान और खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका वायु प्रदूषण (AQI) आम नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन चुका है।

हाल ही में पेश केंद्रीय बजट 2026–27 ने विकास की प्राथमिकताओं को लेकर एक अहम बहस छेड़ दी है—
क्या बुनियादी ढांचे के विस्तार की कीमत हमारी जीवनदायिनी हवा और पर्यावरण को चुकानी पड़ रही है?

बजट आवंटन पर उठते सवाल

बजट दस्तावेजों के अनुसार, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) को कुल केंद्रीय बजट का 0.1 प्रतिशत से भी कम, यानी करीब ₹3,759 करोड़ का आवंटन मिला है। इसके मुकाबले सड़क, रेल और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं पर पर्यावरण से लगभग 150 गुना अधिक खर्च प्रस्तावित है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह असंतुलन विकास मॉडल पर सवाल खड़ा करता है। यदि शहरों की हवा ही सांस लेने योग्य नहीं रहेगी, तो आधुनिक सड़कों, एक्सप्रेसवे और तेज़ रफ्तार ट्रेनों का लाभ आम नागरिक तक कैसे पहुंचेगा?

विकास बनाम पर्यावरण: बढ़ता टकराव

देश के कई बड़े शहरों, खासकर दिल्ली-NCR, में प्रदूषण की स्थिति हर साल और गंभीर होती जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ पहले ही वायु प्रदूषण को “साइलेंट पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी” करार दे चुके हैं। इसके बावजूद बजट में पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण के लिए अपेक्षाकृत सीमित संसाधन चिंता का विषय बने हुए हैं।

पल्लव ग्रीन फाउंडेशन की प्रमुख मांगें

Dr Anjulika Joshi पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में सक्रिय पल्लव ग्रीन फाउंडेशन ने बजट 2026 के बाद सरकार से प्रदूषण से निपटने के लिए ठोस और समयबद्ध कदम उठाने की मांग की है। फाउंडेशन से जुड़ी पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. अंजुलिका जोशी का कहना है कि अब प्रदूषण को केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं, बल्कि आर्थिक और स्वास्थ्य संकट के रूप में देखने की जरूरत है।

फाउंडेशन की ओर से सरकार के समक्ष कई व्यावहारिक सुझाव रखे गए हैं—

डेडिकेटेड पॉल्यूशन बजट:
दिल्ली-NCR और अन्य गंभीर रूप से प्रदूषित शहरों के लिए अलग और समर्पित बजट का प्रावधान किया जाए, जिससे नई तकनीक और प्रभावी समाधान लागू हो सकें।

ग्रीन टैक्स का क्रियान्वयन:
अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाले पुराने और व्यावसायिक वाहनों पर प्रदूषण टैक्स लगाकर स्वच्छ ऊर्जा और हरित परियोजनाओं के लिए फंड तैयार किया जाए।

शहरी वन और ग्रीन बेल्ट:
महानगरों में अर्बन फॉरेस्ट और ग्रीन बेल्ट का विस्तार अनिवार्य किया जाए तथा खाली सार्वजनिक भूमि पर बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया जाए।

सख्त निगरानी और दंड:
प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर भारी जुर्माना लगाया जाए और शहरों के हर हिस्से में रियल-टाइम एयर क्वालिटी सेंसर लगाए जाएं।

EV क्रांति को गति:
इलेक्ट्रिक वाहनों को कागज़ी योजनाओं से बाहर निकालते हुए, सब्सिडी और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के ज़रिए आम लोगों के लिए व्यवहारिक बनाया जाए।

जन-जागरूकता अभियान:
प्रदूषण के खतरों को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बड़े जन-जागरूकता अभियान चलाए जाएं, ताकि नागरिक समाधान का सक्रिय हिस्सा बन सकें।

विशेषज्ञों और पर्यावरण संगठनों का मानना है कि विकास की अंधी दौड़ में प्रकृति को पीछे छोड़ना दीर्घकालिक रूप से देश के लिए घातक साबित हो सकता है। बुनियादी ढांचे के साथ-साथ स्वच्छ हवा और स्वस्थ जीवन पर निवेश अब नीति-निर्माताओं के लिए विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्यता बन चुका है।

यदि समय रहते बजट प्राथमिकताओं और विकास नीतियों में संतुलन नहीं बनाया गया, तो आर्थिक प्रगति का सपना बढ़ती धुंध और जहरीली हवा में धुंधला पड़ सकता है।

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  • Dr. Anjulika Joshi

    Dr. Anjulika Joshi is the cofounder of Pallav Green Foundation.Dr. Joshi has over 40 years of experience in the field of education. She has her doctorate from Central Drug Research Institute, Lucknow.She has always been passionate and big advocate of social issues. She has spent countless hours providing free education to the underprivileged. She also collaborated with “The Earth Saviours Foundation” and worked for the betterment of elderly, orphaned children and women. She was also awarded the Sanjeevani Ratnaat the Sanjeevani National TV Awards ceremony in 2017.Being an ardent nature lover, the unfortunate climate change over the years due to industrialization and urbanization has given her a new mission - to bring change at grassroot level. This propelled her to establish Pallav Green Foundation with the mission to help create a cleaner and greener environment.

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Dr. Anjulika Joshi Dr. Anjulika Joshi is the cofounder of Pallav Green Foundation.Dr. Joshi has over 40 years of experience in the field of education. She has her doctorate from Central Drug Research Institute, Lucknow.She has always been passionate and big advocate of social issues. She has spent countless hours providing free education to the underprivileged. She also collaborated with “The Earth Saviours Foundation” and worked for the betterment of elderly, orphaned children and women. She was also awarded the Sanjeevani Ratnaat the Sanjeevani National TV Awards ceremony in 2017.Being an ardent nature lover, the unfortunate climate change over the years due to industrialization and urbanization has given her a new mission - to bring change at grassroot level. This propelled her to establish Pallav Green Foundation with the mission to help create a cleaner and greener environment.

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