
सोना और चांदी की भारी गिरावट: पीक से 19% और 43% नीचे – क्या अभी खरीदें या होल्ड करें? | तरुण गुप्ता Exclusive
प्रश्न-1: सोने और चांदी का अब तक का सबसे ऊँचा दाम कब और कितना गया था? आज हम उससे कितने नीचे हैं और क्यों?
तरुण गुप्ता: सोने और चांदी दोनों ने जनवरी 2026 में जबरदस्त रैली देखी थी। सोने का सबसे ऊँचा भाव लगभग ₹1,93,000 प्रति 10 ग्राम (या ₹19,30,000 प्रति किलो के आसपास) और चांदी का ₹4,25,000 प्रति किलो के करीब 29 जनवरी 2026 को गया था। यह उस समय की अनिश्चितताओं, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और सुरक्षित निवेश की मांग के कारण हुआ।आज (अप्रैल 2026) सोना अपने उस पीक से करीब 19% नीचे चल रहा है, जबकि चांदी लगभग 43% नीचे है। इस गिरावट के मुख्य कारण मार्केट करेक्शन है। इतनी तेज रैली के बाद प्रॉफिट बुकिंग हुई। कुछ देशों ने रिजर्व से सोना बेचा, और हेजिंग एक्टिविटीज (जोखिम बचाव) भी बढ़ीं। इसके अलावा, अमेरिकी डॉलर में मजबूती और ब्याज दरों से जुड़ी उम्मीदों ने भी दबाव डाला। लेकिन याद रखें, कीमती धातुओं में ऐसे उतार-चढ़ाव सामान्य हैं।
प्रश्न-2: सामान्य समझ यह है कि जब युद्ध हो तो सोना बढ़ता है, लेकिन इस बार ऐसा क्यों नहीं हो रहा?
तरुण गुप्ता: हाँ, आमतौर पर किसी भी बड़ी आपदा या युद्ध में सोना सुरक्षित निवेश के रूप में बढ़ता है। लेकिन इस बार शुरुआती दौर में उल्टा हुआ। जब संकट आता है, तो निवेशक पहले तरलता (नकदी) के लिए सोना बेच देते हैं — जैसे आपात स्थिति में पैसे की जरूरत पड़ने पर। इससे शुरुआत में दाम गिरते हैं। फिर थोड़े समय बाद बाजार ठहराव आता है और सोने की मांग फिर बढ़ती है। इसलिए, विशेषज्ञों का मानना है कि थोड़े समय पश्चात सोने का भाव फिर बढ़ सकता है। यह कोई नया पैटर्न नहीं है, बल्कि आपदा के शुरुआती चरण का सामान्य व्यवहार है।प्रश्न-3: क्या यह सच है कि सोना पहले ही इतना बढ़ चुका था कि अब उसमें प्रॉफिट बुकिंग चल रही है?तरुण गुप्ता का विस्तारित उत्तर:सोना दूसरे सामान्य निवेशों (जैसे शेयर या म्यूचुअल फंड) की तरह नहीं है। बैंक इसे सुरक्षा (security) के तौर पर रिजर्व रखते हैं, और आम लोग भी फाइनेंशियल प्लानिंग के तहत लंबे समय के लिए खरीदते हैं। प्रॉफिट बुकिंग कुछ समय के लिए जरूर हो सकती है, खासकर जब भाव बहुत तेजी से बढ़ जाते हैं। लेकिन सोने में सामान्यतः बड़े पैमाने पर प्रॉफिट बुकिंग नहीं होती, क्योंकि यह मुख्य रूप से सुरक्षित रखने और मूल्य संरक्षण का माध्यम है, न कि रोजाना ट्रेडिंग का। इस बार की गिरावट भी ज्यादा करेक्शन और बाहरी कारकों से आई है, न कि सिर्फ प्रॉफिट बुकिंग से।
प्रश्न-4: चांदी सोने के मुकाबले इतना पीछे क्यों है? क्या इसलिए कि चांदी सिर्फ सुरक्षित निवेश नहीं, बल्कि उद्योग में भी इस्तेमाल होती है?
तरुण गुप्ता: बिल्कुल सही समझा आपने। सोने को बैंक और केंद्रीय बैंक बड़े पैमाने पर खरीदते और रिजर्व रखते हैं, लेकिन चांदी को बैंक आमतौर पर नहीं खरीदते। चांदी की सप्लाई inelastic है — यानी उत्पादन आसानी से नहीं बढ़ाया जा सकता। जब मांग बढ़ती है (खासकर सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स, EV आदि उद्योगों में), तो भाव बहुत तेजी से बढ़ता है। लेकिन मांग थोड़ी भी घटती है या बाजार में सुधार आता है, तो भाव तेजी से गिर भी जाता है। यही वजह है कि इस गिरावट में चांदी सोने से ज्यादा प्रभावित हुई। चांदी उद्योगिक धातु (industrial metal) भी है, इसलिए उसका व्यवहार सोने से अलग होता है।
प्रश्न-5: क्या अभी जो गिरावट दिख रही है, यह temporary है या ट्रेंड बदल रहा है? आम निवेशक कैसे समझे?
तरुण गुप्ता: सोने में यह गिरावट अस्थायी (temporary) लग रही है — यह मार्केट करेक्शन का हिस्सा है, जो तेज रैली के बाद आता है। लेकिन चांदी में ट्रेंड बदलने के संकेत ज्यादा दिख रहे हैं, क्योंकि उसकी उद्योगिक मांग और सप्लाई डायनामिक्स अलग हैं।आम निवेशक कैसे समझें? देखें लंबी अवधि का चार्ट, गोल्ड-सिल्वर रेशियो, और वैश्विक आर्थिक संकेत। अगर आपका निवेश क्षितिज 3-5 साल या उससे ज्यादा है, तो सोना अभी भी मजबूत रह सकता है। चांदी में ज्यादा उतार-चढ़ाव की तैयारी रखें। हमेशा छोटी-छोटी राशि में निवेश करें और diversification बनाए रखें।
प्रश्न-6: अगर कोई निवेशक अभी एंट्री लेना चाहता है, तो क्या यह सही समय है या अभी और गिरावट आ सकती है?
तरुण गुप्ता:अभी तुरंत पूरी राशि लगाने की बजाय करेक्शन का इंतजार करें। अगर भाव और थोड़ा गिरे, तो अच्छा एंट्री पॉइंट बन सकता है। सोने में लंबे समय के लिए खरीदारी सोचें, जबकि चांदी में ट्रेडिंग की सोच रखें। हमेशा अपनी रिस्क क्षमता और फाइनेंशियल गोल के अनुसार फैसला लें। किसी भी निवेश से पहले विशेषज्ञ या फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह जरूर लें।
प्रश्न-7: क्या हमें सोने और चांदी को अलग-अलग नजर से देखना चाहिए — यानी सोना सेफ्टी के लिए और चांदी ग्रोथ के लिए?
तरुण गुप्ता: हाँ, बिल्कुल। मैं अक्सर कहता हूँ — सोना पैदल सैनिक है, जो स्थिर और भरोसेमंद तरीके से आगे बढ़ता है। यह लंबे समय के निवेश और सुरक्षा के लिए बेहतर है। चांदी कमांडो सैनिक है — तेज, आक्रामक, लेकिन ज्यादा जोखिम वाली। यह ट्रेडिंग और शॉर्ट टर्म ग्रोथ के लिए अच्छी है, क्योंकि इसमें तेज उतार-चढ़ाव होते हैं। पोर्टफोलियो में दोनों को बैलेंस करके रखें: सोना स्थिरता देगा, चांदी ग्रोथ की संभावना। लेकिन अपनी जोखिम सहनशक्ति के अनुसार मात्रा तय करें।
प्रश्न-8: अगर युद्ध और बढ़ता है, तो क्या सोना फिर से तेजी पकड़ सकता है? और चांदी क्या उसके बाद चलेगा या नीचे?
तरुण गुप्ता: अगर युद्ध बढ़ता है, तो सोना फिर तेजी पकड़ सकता है, क्योंकि उस पर मुद्रा (currency) का ज्यादा असर पड़ता है। अगर डॉलर कमजोर होता है या अनिश्चितता बढ़ती है, तो सोना मजबूत होता है।चांदी उद्योगिक धातु है, इसलिए अगर युद्ध से इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर, ऑटो आदि इंडस्ट्री में बाधा आती है, तो उसकी मांग कम हो सकती है और दाम गिर सकते हैं। यानी युद्ध में सोना ज्यादा सुरक्षित रह सकता है, जबकि चांदी का प्रदर्शन मिश्रित रहने की संभावना है।
प्रश्न-9: भारत में आम लोग सोना ज्यादा खरीदते हैं, लेकिन क्या इस समय चांदी बेहतर मौका दे सकती है?
तरुण गुप्ता: भारत में लोग मुख्य रूप से buy & hold की संस्कृति रखते हैं — ट्रेडिंग कम करते हैं। यहां सोना सांस्कृतिक, भावनात्मक और सुरक्षा का प्रतीक भी है। इसलिए भारतीय निवेशकों के लिए सोना ही ज्यादा उपयुक्त है।चांदी में ज्यादा उतार-चढ़ाव है, जो ट्रेडिंग करने वालों के लिए अच्छा है, लेकिन आम आदमी के लिए जोखिम भरा हो सकता है। इस समय भी भारतीयों के लिए सोना ही बेहतर और सुरक्षित विकल्प माना जा सकता है।
प्रश्न-10: एक साधारण सलाह — अगर किसी के पास पहले से सोना या चांदी है, तो अभी होल्ड करें, बेच दें या और खरीदें?
तरुण गुप्ता: सोना रखें (Hold करें) — यह लंबे समय के लिए अच्छा निवेश है। गिरावट के बावजूद इसका मूल्य संरक्षण का गुण बना रहता है।चांदी के मामले में — अगर भाव तीन लाख रुपये प्रति किलो के ऊपर चला जाए, तो प्रॉफिट बुकिंग पर विचार करें। अभी होल्ड करने वालों को धैर्य रखना चाहिए, लेकिन नई खरीदारी में सावधानी बरतें।सबसे महत्वपूर्ण: अपनी व्यक्तिगत स्थिति, जोखिम क्षमता और जरूरतों के अनुसार फैसला लें। कीमती धातुएं पोर्टफोलियो का हिस्सा हो सकती हैं, लेकिन पूरा पैसा इनमें न लगाएं। हमेशा diversified निवेश करें और जरूरत पड़ने पर पेशेवर सलाह लें।
यह जानकारी केवल शैक्षिक और सूचनात्मक उद्देश्य से है। यह किसी भी प्रकार की निवेश सलाह नहीं है। सोना-चांदी में निवेश जोखिमपूर्ण है। कोई भी खरीद-बिक्री का फैसला लेने से पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह अवश्य लें। संजीवनी TV और तरुण गुप्ता किसी भी लाभ-हानि के लिए उत्तरदायी नहीं हैं।